
Fatty Liver: फैटी लिवर शरीर के अंग को कर सकता है क्षतिग्रस्त हो जाये सावधान !
Fatty Liver: फैटी लिवर एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर में अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है, जिससे लिवर की सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लिवर के सेल्स में वसा का प्रतिशत 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। यह बीमारी आमतौर पर उन लोगों में होती है जो मोटापे, डायबिटीज़, या अनियमित खानपान और शराब के सेवन से प्रभावित होते हैं। फैटी लिवर दो प्रकार का होता है: अल्कोहलिक और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD)।
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फैटी लिवर कैसे शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करता है?
लिवर की क्षति: फैटी लिवर की शुरुआत में लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा होती है। अगर समय पर इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह लिवर में सूजन और स्कारिंग (सिरोसिस) का कारण बन सकता है। इस स्थिति में लिवर की कार्यक्षमता कम हो जाती है और लिवर फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है।
हृदय संबंधी समस्याएँ: फैटी लिवर का सीधा असर हृदय पर पड़ता है। इसके कारण हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है, क्योंकि फैटी लिवर वाले लोगों में उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, और इंसुलिन रेज़िस्टेंस की समस्याएँ अधिक देखी जाती हैं।
किडनी पर प्रभाव: जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तो किडनी पर अधिक दबाव पड़ता है। इससे किडनी की कार्यक्षमता भी कम हो सकती है और किडनी फेल्योर का खतरा बढ़ सकता है।
पाचन तंत्र पर प्रभाव: लिवर का मुख्य काम पाचन के लिए बाइल का उत्पादन करना होता है। फैटी लिवर की स्थिति में बाइल का उत्पादन बाधित हो सकता है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है और पाचन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
मस्तिष्क पर असर: लिवर की खराबी मस्तिष्क पर भी असर डाल सकती है, जिससे मानसिक भ्रम, ध्यान की कमी, और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसे “हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी” कहा जाता है।
बचाव और उपचार
फैटी लिवर से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, और शराब के सेवन से बचाव करके इस बीमारी से बचा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को फैटी लिवर हो गया है, तो उसे समय पर डॉक्टर से परामर्श लेकर उपचार शुरू करना चाहिए ताकि लिवर और अन्य अंगों को अधिक नुकसान से बचाया जा सके।
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