देश में 85%आबादी वाले पसमांदा मुसलमानो के हालात बद से बदतर

देश में 85%आबादी वाले पसमांदा मुसलमानो के हालात बद से बदतर

प्रधानमंत्री ने पसमांदा मुसलमानो (Pasmanda Muslims) की बदहाली को लेकर कई बार चिंता जताई है जो इस बात को साबित करती है कि देश में 85%आबादी वाले पसमांदा मुसलमानो के हालात बद से बदतर हैं

लखनऊ के एक नामचीन मौलाना और ऊँची जाति के मुस्लिम सांसद का बयान सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है मौलाना कहते हुए नज़र आरहे हैं कि पसमांदा मुसलमानो और अशराफ का इस्लाम में कोई कॉन्सेप्ट नहीं है इस्लाम में कोई छोटा बडा नहीं है सभी मुसलमान बराबर हैं। यह बात पसमांदा मुस्लिम (Pasmanda Muslims) समाज के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने कही।

मेरी लड़ाई धार्मिक नहीं सामजिक है – अनीस मंसूरी

अनीस मंसूरी ने कहा कि बेशक इस्लाम में पसमांदा और अशराफ कोई कॉन्सेप्ट नहीं है, मैं भी मानता हूं, मेरे ईमान का भी हिस्सा है, इस्लाम में सब बराबर है यही हमारा ईमान है, इस्लाम में तो यह है लेकिन मुसलमानो में नहीं है, मेरी लड़ाई धार्मिक नहीं है मेरी लड़ाई सामजिक है जहां अशराफ (ऊँची ज़ात) मुसलमानो ने पसमांदा मुसलमानो (Pasmanda Muslims) को किसी भी क्षेत्र में बराबरी का दर्जा नहीं दिया बल्कि उनका शोषण किया जो लोग सब मुसलमानो की बराबरी की वकालत कर रहे हैं उनको मुसलमानो की पसमांदगी कभी नज़र नहीं आयी।

प्रधानमंत्री पसमांदा मुसलमानो की बदहाली को लेकर काफ़ी चिंतित हैं

मंसूरी ने कहा कि पसमांदा मुसलमानो (Pasmanda Muslims) की बदहाली को लेकर समाज में फैली भेदभाव की नीति पर काका कलेनकर आयोग, रंगनाथ मिश्र कमीशन, जस्टिस राजिंन्द्र सच्चर कमीटी, ने अपनी रिपोर्ट के ज़रिये मोहर लगाई है। यही नहीं अभी हाल में ही देश के माननीय प्रधानमंत्री जी ने पसमांदा मुसलमानो की बदहाली को लेकर कई बार गहरी चिंता जताई है जो इस बात को साबित करती है कि देश में 85%आबादी वाले पसमांदा मुसलमानो के हालात बद से बदतर हैं।

उन्होनें यह भी कहा कि 15 सालों के लम्बे संघर्ष के बाद जब हमने पसमांदा मुसलमानो (Pasmanda Muslims) की समस्याओं को लेकर के देश में जब जन आंदोलन खड़ा किया तो जमींदारी सोच रखने वाली राजनैतिक पार्टियों और उन पार्टियों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सरकारी मौलानाओं के पेट में दर्द हो रहा है।

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जब पसमांदा मुसलमान (Pasmanda Muslims) अपना हक़ पाने के क़रीब होते हैं तो पसमांदा दुश्मन सोच के लोग इस्लाम की दुहाई देकर हमारे आंदोलन को कमज़ोर करने का प्रयास करते हैं। अनीस मंसूरी ने कहा मैं मौलाना साहब से कहना चाहता हूं कि अगर सब मुसलमान बराबर हैं तो ऐशबाग़ ईदगाह का इमाम किसी पसमांदा मुसलमान को क्यों नहीं बना देते?

इस अवसर पर हाजी नसीम अहमद राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, हाजी शब्बन , ऐजाज़ अहमद एडवोकेट, पप्पू कुरैशी, इमरान अहमद मिर्ज़ा, फ़ाज़िल अंसारी के अलावा काफी लोग मौजूद थे।

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